दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर दीप जलाये है कितने दीप बुझा कर मिली है जब ये आज़ादी तो फिर से इस आज़ादी को रखना होगा हर दुश्मन से आज बचाकर

दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर
दीप जलाये है कितने दीप बुझा कर
मिली है जब ये आज़ादी तो फिर से इस आज़ादी को
रखना होगा हर दुश्मन से आज बचाकर